संपादक – शेखर वर्मा
बालोद। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, महान शिक्षाविद एवं देश के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय बालोद सहित जिले के विभिन्न स्थलों एवं बूथ स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला भाजपा कार्यालय में डॉ. मुखर्जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर वरिष्ठ नेता पवन साहू, कृष्णकांत पवार, राकेश “छोटू” यादव, जितेंद्र साहू, प्रेम साहू, विनोद जैन, दुर्जन साहू सहित पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 6 जुलाई 1901 को बंगाल की पवित्र धरती पर जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक विलक्षण प्रतिभा, राष्ट्रवादी विचारक एवं युगपुरुष थे। उन्होंने अल्पायु में ही शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां अर्जित कीं। वर्ष 1921 में अंग्रेजी ऑनर्स तथा 1923 में बंगाल साहित्य एवं विधि की शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तथा मात्र 23 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य बने। 33 वर्ष की आयु में वे कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने।
वक्ताओं ने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने शिक्षा के क्षेत्र में कृषि शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, महिला शिक्षा एवं हिंदी पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया। उन्होंने वर्ष 1937 में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को बंगाली भाषा में दीक्षांत भाषण देने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 1939 में वे वीर सावरकर के संपर्क में आए और हिंदू महासभा से जुड़कर राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचारों को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि देश विभाजन के कठिन दौर में डॉ. मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल को भारत में बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद महात्मा गांधी एवं सरदार वल्लभभाई पटेल के आग्रह पर वे देश के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बने। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट तथा देश के औद्योगिक विकास की अनेक आधारभूत योजनाओं में उनकी दूरदर्शिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वक्ताओं ने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार एवं नेहरू-लियाकत समझौते के विरोध में उन्होंने सिद्धांतों के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर आदर्श राजनीतिक आचरण का उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में राष्ट्र सेवा कर रहा है।
डॉ. मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का उद्घोष करते हुए अखंड भारत की अवधारणा को सशक्त स्वर दिया। जम्मू-कश्मीर में परमिट व्यवस्था के विरोध में उन्होंने बिना परमिट प्रवेश कर आंदोलन का नेतृत्व किया। 8 मई 1953 को उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद किया गया तथा संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हो गया।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को आज भारतीय जनता पार्टी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर देश में एक संविधान, एक निशान और एक विधान की भावना को सशक्त किया गया है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने भारत माता के इस महान सपूत को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
कमल पनपालिया
मिडिया प्रभारी
भारतीय जनता पार्टी जिला बालोद